करन माहरा का आरोप – व्यवस्था की नीयत पर ही संकट, सत्ता के करीबियों को बचाने में लगी सरकार
देहरादून। बेरोजगार युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी के आरोपी हाकम सिंह को सरकार की ढीली और संदिग्ध पैरवी के चलते क्लीन चिट मिल जाना महज एक कानूनी फैसला नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। आज हाकम सिंह खुलेआम जश्न मना रहा है, जबकि सत्ता के गलियारों में बैठे लोग संतुष्ट नजर आ रहे हैं।
करन माहरा का कहना है कि अगर सरकार सच में निष्पक्ष होती, तो इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देती, लेकिन ऐसा नहीं होगा क्योंकि यह मामला न्याय से ज्यादा रिश्तों और संरक्षण का बन चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की राजनीति में अपने लोगों को बचाना प्राथमिकता है, चाहे उसके लिए सच और न्याय की बलि ही क्यों न देनी पड़े।
अंकिता भंडारी मामले में जिस तरह ‘वीआईपी’ को बचाने की कोशिशें हुईं, वह किसी से छिपा नहीं है। अब हाकम सिंह को मिली राहत उसी पैटर्न को दोहराती दिख रही है। माहरा ने साफ कहा कि यह सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने की बात नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को ढाल बनाकर सच को दबाने की कोशिश है।
जब तक सत्ता अपने करीबियों को बचाने में लगी रहेगी, तब तक आम जनता, खासकर युवा, खुद को ठगा हुआ महसूस करते रहेंगे। यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि व्यवस्था की नीयत का आईना है।

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