
देहरादून। शहर के कूड़ा निस्तारण केंद्र शीशमबाड़ा वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट में वर्षों पुराने कचरे के निस्तारण कार्य में गंभीर खामियां सामने आने के बाद नगर निगम ने कंपनी के भुगतान पर रोक लगा दी है। नगर आयुक्त आलोक कुमार पांडेय के निरीक्षण और उसके बाद हुई जांच में यह मामला उजागर हुआ। जानकारी के अनुसार, निगम ने प्लांट में जमा पुराने कूड़े के निस्तारण के लिए एक निजी कंपनी को लगभग 4.32 करोड़ रुपये का ठेका दिया था।
जांच में सामने आया कि कंपनी ने निर्धारित बजट के मुकाबले करीब साढ़े तीन करोड़ रुपये ही खर्च किए, जबकि कार्य भी तय लक्ष्य के अनुरूप पूरा नहीं किया गया। निरीक्षण के दौरान प्लांट परिसर में वर्तमान में भी बड़ी मात्रा में पुराना कचरा जमा मिला। नगर आयुक्त ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के सभी लंबित भुगतानों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। साथ ही पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच कराने के लिए रुड़की की एक एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपने के निर्देश दिए है।
नगर निगम और कंपनी के बीच हुए अनुबंध के अनुसार जून 2026 तक वर्षों से जमा कचरे का शत-प्रतिशत निस्तारण किया जाना था। हालांकि मौके की स्थिति देखने पर यह लक्ष्य पूरा होता नहीं दिखा। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पुराने कचरे को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जाए और कचरा प्रबंधन व्यवस्था को नियमित बनाया जाए। उन्होंने ताजा कचरे के शीघ्र निस्तारण तथा आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) के अनुबंध के अनुसार निपटारे के भी निर्देश दिए हैं, ताकि प्लांट पर अतिरिक्त दबाव न बने और भविष्य में कचरे का ढेर न लग सके।
शीशमबाड़ा प्लांट के निरीक्षण में पुराने कचरे के निस्तारण कार्य में कई कमियां नजर आई हैं। जो परेशानी है वह कचरे के उचित निस्तापण को लेकर है। इससे प्लांट में कचरे का अनावश्यक दबाव बन गया है। यह कचरा निस्तारित क्यों नहीं हो रहा इसकी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। – आलोक कुमार पांडेय, नगर आयुक्त, देहरादून नगर निगम।

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