एमआईटी के वैज्ञानिकों ने बनाई सोलर थर्मल बैटरी, सूर्यास्त के 14 घंटे बाद भी मिलेगा गर्म पानी

देहरादून। एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने ‘फेज चेंज मटेरियल’ आधारित सौर तापीय ऊर्जा संचयन प्रणाली विकसित की है, जो सूर्यास्त के बाद भी 12 से 14 घंटे तक गर्म पानी उपलब्ध कराएगी। यह नवाचार बिजली और पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाकर सालाना 2.5 से 3 टन कार्बन उत्सर्जन कम करेगा।

एमआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की डॉ. अनीता नेने और डॉ. रोहित घाडगे ने यह प्रणाली विकसित की है। इसमें ‘शेफलर सोलर कंसंट्रेटर’ को पैराफिन वैक्स युक्त थर्मल स्टोरेज कैप्सूल के साथ जोड़ा गया है। पैराफिन वैक्स गर्मी को संग्रहीत कर जरूरत पड़ने पर छोड़ता है। इलेक्ट्रोकेमिकल बैटरी के बजाय यह समाधान ऊर्जा को सीधे गर्मी के रूप में स्टोर करता है।

गर्मी को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए इसमें अलग करने योग्य पीसीएम ट्यूब, वॉटर-जैकेट हीट ट्रांसफर मैकेनिज्म और पॉलीयुरेथेन इंसुलेशन लगाया गया है। प्रयोगशाला परीक्षण में यह तकनीक 18 मिनट में पूरी तरह चार्ज और 32 मिनट में डिस्चार्ज हो गई। सौर इनपुट हटाने के बाद भी गर्म पानी की आपूर्ति जारी रही।

प्रोटोटाइप करीब 1.5 से 2 kWh थर्मल ऊर्जा संग्रहीत करता है और चार्जिंग के बाद 14 घंटे तक पानी का तापमान 50°C से 60°C बनाए रख सकता है। इसकी थर्मल दक्षता 55% दर्ज की गई है। पारंपरिक इलेक्ट्रिक वॉटर हीटर की तुलना में यह भारत के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों में बड़ा योगदान देगा।

डॉ. अनीता नेने ने कहा, “सौर ऊर्जा की सीमा यह है कि सूरज रहने पर ही मिलती है। हमारा लक्ष्य सरल, सस्ता और टिकाऊ थर्मल स्टोरेज बनाना था जो जरूरत पर ऊर्जा दे सके।” डॉ. रोहित घाडगे ने कहा, “कुल ऊर्जा खपत में तापीय ऊर्जा का बड़ा हिस्सा है। सौर ताप का कुशल संचयन पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता घटाएगा।”

शोधकर्ताओं ने प्रदर्शन जांचने के लिए लैब सत्यापन के साथ ‘कंप्यूटेशनल फ्लूइड डायनेमिक्स’ सिमुलेशन भी किए। यह तकनीक ‘टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल’ 7 पर है और पायलट तैनाती के लिए तैयार है। इसके संभावित उपयोग आवासीय वॉटर हीटिंग, होटल, अस्पताल, छात्रावास, शैक्षणिक संस्थान, औद्योगिक प्रक्रिया हीटिंग, सामुदायिक रसोई, कृषि कार्य और ऑफ-ग्रिड ग्रामीण इलाकों में हैं।

“सोलर एनर्जी स्टोरेज कैप्सूल यूजिंग फेज चेंज मटेरियल” शीर्षक से भारतीय पेटेंट आवेदन संख्या 202521118546 दायर किया गया है। शोधकर्ता पायलट तैनाती और व्यावसायीकरण के लिए उद्योग भागीदार तलाश रहे हैं। डॉ. नेने ने बताया कि अगला चरण फील्ड ट्रायल, प्रदर्शन सुधार और बड़े पैमाने पर उत्पादन पर केंद्रित होगा।

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