15-17 साल की सेवा, फिर भी ₹5,700 का अपमानजनक वेतन! जन संघर्ष मोर्चा ने प्रमुख अभियंता के समक्ष रखी पंप ऑपरेटरों की व्यथा

24 घंटे ड्यूटी, ऊपर से EPF-ESI की कटौती — ठेकेदारी प्रथा के जाल में फंसे कर्मचारियों को न्याय की आस

देहरादून। सिंचाई विभाग की लिफ्ट योजनाओं में वर्षों से खून-पसीना बहा रहे पंप ऑपरेटरों की दुर्दशा अब जन संघर्ष मोर्चा की आवाज बनकर अधिकारियों के दरबार तक पहुंच गई है। मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने सिंचाई विभाग के प्रमुख अभियंता (एचओडी) सुभाष पांडे से मुलाकात कर इन कर्मचारियों के वेतन शोषण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया और उन्हें ज्ञापन सौंपा।

नेगी ने बताया कि उत्तरकाशी, टिहरी व अन्य पर्वतीय जनपदों में नलकूप खंडों की लिफ्ट योजनाओं के अंतर्गत ठेकेदारी प्रथा के जरिए काम कर रहे ये पंप ऑपरेटर 15 से 17 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इतने लंबे अनुभव और अथक परिश्रम के बावजूद इन्हें EPF व ESI की कटौती के बाद महज ₹5,700 प्रतिमाह थमाकर विभागीय ठेकेदार पल्ला झाड़ लेते हैं। इन कर्मचारियों की ड्यूटी वस्तुतः चौबीसों घंटे की है, जो किसी भी श्रम मानक की खुलेआम अनदेखी है।

मोर्चा अध्यक्ष नेगी ने तीखे स्वर में कहा कि इन कर्मचारियों ने यह सोचकर अपना जीवन इस काम में खपा दिया कि एक दिन हालात बदलेंगे, लेकिन ठेकेदारी व्यवस्था की बेड़ियों में जकड़े इन मजदूरों के अच्छे दिन आज भी सिर्फ सपना बनकर रह गए हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि जिन विधायकों को इन मजदूरों ने वोट देकर विधानसभा भेजा, वे आज इनके हक की लड़ाई लड़ने की बजाय अपने वेतन-भत्ते बढ़ाने और आर्थिक साम्राज्य फैलाने में व्यस्त हैं। शासन और संबंधित विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी उन्होंने सवाल उठाए।

प्रमुख अभियंता सुभाष पांडे ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि पूरे प्रकरण की जांच करवाकर शीघ्र समाधान निकाला जाएगा। मोर्चा को भरोसा है कि इन ऑपरेटरों की मांगें जल्द पूरी होंगी। प्रतिनिधिमंडल में हाजी असद, प्रवीण शर्मा पिन्नी और ब्लॉक अध्यक्ष भीम सिंह बिष्ट भी मौजूद रहे।

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