

देहरादून। जल जीवन मिशन के तहत देहरादून जिले में चल रही पेयजल परियोजनाओं को लेकर जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई जिला जल एवं स्वच्छता मिशन की बैठक में उन्होंने कहा कि फेज-2 की बची हुई परियोजनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा किया जाए। केंद्र से 208 करोड़ रुपये की राशि तभी मिलेगी जब काम समय पर होंगे।
DM ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो योजनाएं पूरी हो चुकी हैं उनका थर्ड पार्टी निरीक्षण और वित्तीय समापन में देरी न हो। ‘हर घर जल’ प्रमाणन की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जाए। बैठक में जानकारी दी गई कि जिले के 1,29,491 ग्रामीण परिवारों में से 1,29,449 परिवारों को नल कनेक्शन मिल चुका है। फेज-1 की सभी 333 और फेज-2 की 760 में से 734 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं। 26 योजनाओं पर काम चल रहा है, जिनमें 3 वन भूमि की वजह से अटकी हैं।
बैठक में सबसे ज्यादा नाराजगी ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समितियों के गठन को लेकर दिखी। जिले के 635 गांवों में से अब तक सिर्फ 298 में ही समितियां बन पाई हैं। चकराता में 139, सहसपुर में 90, डोईवाला में 31, रायपुर में 54 और विकासनगर में 23 गांवों में समिति नहीं बनी है। इस पर DM ने संबंधित सहायक विकास अधिकारियों पंचायत के वेतन आहरण पर रोक लगाने के आदेश दिए और सभी ग्राम पंचायतों में तुरंत समितियों का पुनर्गठन कर रिपोर्ट मांगी है।
थर्ड पार्टी निरीक्षण की धीमी प्रगति पर भी DM ने फटकार लगाई। अब तक 426 में से सिर्फ 281 योजनाओं का TPI हुआ है और 121 का ही वित्तीय समापन हो पाया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि निर्माण पूरा होते ही निरीक्षण और क्लोजर की प्रक्रिया बिना देरी पूरी की जाए।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण की समीक्षा में DM ने ठोस-तरल कचरा प्रबंधन और शौचालय निर्माण में तेजी लाने को कहा। जिला पंचायत से ब्लॉक स्तर पर प्लास्टिक कचरा उठान के लिए रूट चार्ट और वाहन व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, जल निगम और जल संस्थान के अधिकारी, जिला विकास अधिकारी समेत संबंधित विभागों के अफसर मौजूद रहे।

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