“चुपके से बढ़ती है यह बीमारी, पता चलने तक हो चुका होता है लिवर बर्बाद” –  विश्व हेपेटाइटिस दिवस पर मैक्स हॉस्पिटल का बड़ा अलर्ट

डॉ. मयंक गुप्ता बोले- समय पर जांच और टीकाकरण से रुक सकता है खतरा, 2030 तक हेपेटाइटिस मुक्ति का वैश्विक लक्ष्य

देहरादून। विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, देहरादून ने वायरल हेपेटाइटिस के प्रति लोगों को जागरूक करने और समय पर जांच, टीकाकरण, शीघ्र पहचान तथा उचित इलाज की आवश्यकता पर जोर दिया। इस वर्ष की थीम “Hepatitis: Let’s Break It Down” के जरिए लोगों को जागरूकता बढ़ाने, समय पर जांच कराने और बेहतर देखभाल तक पहुंच में आने वाली बाधाओं को दूर करने का संदेश दिया गया। इसमें हेपेटाइटिस के पांचों प्रकार- A, B, C, D और E के बारे में सही जानकारी फैलाने पर भी जोर है।

विशेषज्ञों के अनुसार वायरल हेपेटाइटिस आज भी दुनिया भर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है और यह लिवर सिरोसिस तथा लिवर कैंसर के प्रमुख कारणों में शामिल है। हेपेटाइटिस A, B और E से बचाव के लिए प्रभावी टीके मौजूद हैं, जबकि हेपेटाइटिस C का इलाज अब आधुनिक एंटीवायरल दवाओं से संभव है। बावजूद इसके, बड़ी संख्या में संक्रमित लोगों को अपनी बीमारी का पता ही नहीं चल पाता, क्योंकि शुरुआती दौर में यह बिना स्पष्ट लक्षणों के धीरे-धीरे बढ़ती है, जिससे लिवर को नुकसान पहुंचने तक अक्सर देर हो चुकी होती है।

चिकित्सकों ने बताया कि हेपेटाइटिस A और E दूषित भोजन तथा गंदे पानी से फैलते हैं, जबकि हेपेटाइटिस B, C और D संक्रमित खून और शरीर के अन्य तरल पदार्थों के संपर्क से फैलते हैं। बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता, सुरक्षित भोजन-पानी, असुरक्षित इंजेक्शन से परहेज, जांचा हुआ रक्त चढ़ाना और डॉक्टर की सलाह पर टीकाकरण जरूरी बताया गया। सामान्य लक्षणों में लगातार थकान, भूख कम लगना, मतली-उल्टी, पेट दर्द, बुखार, पीलिया, पेशाब का गहरा रंग और अकारण वजन घटना शामिल हैं, हालांकि कई मरीजों में महीनों-वर्षों तक कोई लक्षण नजर नहीं आते।

मैक्स हॉस्पिटल देहरादून के प्रिंसिपल कंसल्टेंट (गैस्ट्रोएंटरोलॉजी) डॉ. मयंक गुप्ता ने कहा कि वायरल हेपेटाइटिस की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि ज्यादातर मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है जब लिवर को काफी नुकसान पहुंच चुका होता है। उन्होंने कहा कि जागरूकता बढ़ाना, समय पर जांच, टीकाकरण का दायरा बढ़ाना और सबको उचित इलाज उपलब्ध कराना 2030 तक हेपेटाइटिस को सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने के वैश्विक लक्ष्य के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि हेपेटाइटिस से जुड़े सामाजिक संकोच और भ्रांतियां दूर करना जरूरी है, क्योंकि डर और गलत जानकारी के चलते कई लोग समय पर जांच व इलाज नहीं कराते।

मैक्स हॉस्पिटल ने लोगों से अपील की कि वे लिवर स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें, हेपेटाइटिस के जोखिम को समझें और लक्षण दिखने पर बिना देरी डॉक्टर से सलाह लें।

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