तुलाज़ इंस्टीट्यूट से तुलाज़ यूनिवर्सिटी तक, 20 वर्षों की यात्रा ने रचा नया इतिहास

उत्तराखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ संशोधन अधिनियम-2026 के तहत मिली मान्यता, शिक्षा, शोध और कौशल विकास के नए विस्तार का खुला मार्ग

देहरादून । वर्ष 2006 में स्थापित तुलाज़ इंस्टीट्यूट अब आधिकारिक रूप से तुलाज़ यूनिवर्सिटी बन गया है। उत्तराखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत मिली यह स्वीकृति न केवल संस्थान के लिए, बल्कि राज्य में उच्च शिक्षा के क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। दो दशकों के शैक्षणिक सफर के बाद विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना तुलाज़ की गुणवत्ता, शोध उन्मुखता और उद्योग से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता का प्रमाण माना जा रहा है।

दून घाटी की प्राकृतिक हरियाली के बीच फैले 22 एकड़ परिसर में अब इंजीनियरिंग, कृषि, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, पत्रकारिता एवं जनसंचार, फार्मेसी और विधि जैसे विषयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। प्रबंधन के अनुसार विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को और सशक्त बनाने के लिए नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों को बदलते समय और रोजगार बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप शिक्षा मिल सके।

तुलाज़ यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुनील कुमार जैन ने कहा कि वर्ष 2006 में संस्थान की स्थापना का उद्देश्य विद्यार्थियों को ऐसी ईमानदार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना था, जो उन्हें केवल परीक्षा के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दर्जा उस सपने के विस्तृत रूप का प्रतीक है। उन्होंने नैक ए+ मान्यता, एनबीए से मान्यता प्राप्त कार्यक्रमों, एआईसीटीई समर्थित आइडिया लैब, आईहब-आईआईटी रोपड़ के सहयोग से स्थापित साइबर फिजिकल सिस्टम लैब, यूकॉस्ट समर्थित टेक्नोलॉजी रिसोर्स सेंटर और तुलाज़ टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर जैसी पहलों को संस्थान की गुणवत्ता-केन्द्रित सोच का परिणाम बताया।

सह-संस्थापक एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष रौनक जैन ने कहा कि तुलाज़ में शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, आत्मविश्वास और चरित्र का निर्माण भी है। उन्होंने कहा कि इसी कारण पाठ्यक्रम के साथ प्रायोगिक प्रशिक्षण, लाइव प्रोजेक्ट्स और कौशल विकास पर विशेष बल दिया जाता है। उनके अनुसार कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़ी शिक्षा अब हर पाठ्यक्रम का हिस्सा बन चुकी है, क्योंकि भविष्य की दुनिया में इसकी उपयोगिता प्रत्येक क्षेत्र में होगी। उन्होंने बताया कि संस्थान की टीम ने स्टार्टअप महाकुंभ 2025 में दूसरा स्थान प्राप्त किया था और उनके नवाचार को केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने ग्रैंड फिनाले में सम्मानित किया था।

तुलाज़ ग्रुप की महानिदेशक सिल्की जैन मारवाह ने कहा कि उन्होंने संस्थान को एक छोटे शिक्षण संस्थान से विश्वविद्यालय बनने तक का सफर निकट से देखा है। उनके अनुसार प्रत्येक विद्यार्थी किसी परिवार का सपना होता है और उसे सही दिशा देना संस्थान की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि उद्योग जगत से मजबूत संबंध स्थापित कर विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना और समय-समय पर सही मार्गदर्शन देना तुलाज़ की प्राथमिकता रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय बनने के बाद यह जिम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है।

तुलाज़ ने पिछले दो दशकों में राष्ट्रीय स्तर पर भी उल्लेखनीय पहचान बनाई है। द वीक 2026 ने इसे देहरादून का नंबर-1 निजी इंजीनियरिंग कॉलेज घोषित किया, जबकि इंडिया टुडे 2026 ने इसे देश के शीर्ष 40 उभरते निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में स्थान दिया। नैक ए+ मान्यता, कई कार्यक्रमों की एनबीए मान्यता और सूचना प्रौद्योगिकी, बैंकिंग, स्वास्थ्य सेवा तथा मीडिया जैसे क्षेत्रों में मजबूत प्लेसमेंट रिकॉर्ड संस्थान की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल हैं।

विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के साथ तुलाज़ अब एक नए शैक्षणिक अध्याय में प्रवेश कर चुका है, जहां उसका लक्ष्य केवल उच्च शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि ऐसे सक्षम, विनम्र और भविष्य के लिए तैयार पेशेवर तैयार करना है, जो देश और समाज के विकास में सार्थक भूमिका निभा सकें।

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