लंबित मामलों का बोझ घटेगा: सुप्रीम कोर्ट में 33 से 37 होंगे जज, बंसल बोले- समय पर न्याय ही असली अधिकार

नई दिल्ली। भाजपा के राष्ट्रीय सहकोषाध्यक्ष और राज्यसभा सांसद डॉ. नरेश बंसल ने मंगलवार को सदन में सर्वोच्च न्यायालय न्यायाधीशों की संख्या संशोधन विधेयक 2026 पर चर्चा में भाग लेते हुए बिल का पुरजोर समर्थन किया।

डॉ. बंसल ने कहा कि सरकारें निरंतरता में काम करती हैं और जब सदन सत्र में नहीं होता तो अध्यादेश के जरिए जरूरी कानून लाए जाते हैं। यही अध्यादेश अब विधेयक के रूप में सदन में आया है। इस विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट में स्वीकृत न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी। मुख्य न्यायाधीश को मिलाकर कुल संख्या 38 हो जाएगी। इसके लिए प्रशासनिक ढांचे और वित्तीय प्रावधान भी तय किए गए हैं।

उन्होंने आंकड़ों के हवाले से कहा कि सुप्रीम कोर्ट में 95 हजार से अधिक मामले लंबित हैं। वर्ष 2025 में 75,410 नए मामले आए जबकि 65,615 मामलों का निपटारा हुआ। यानी हर साल लगभग 10 हजार मामले अतिरिक्त जुड़ रहे हैं। 3,525 जनहित याचिकाएं भी लंबित हैं, जिनमें 698 एक दशक से पुरानी हैं। सबसे पुरानी पीआईएल 1984 की है।

डॉ. बंसल ने अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय को संवैधानिक गारंटी बताते हुए कहा कि न्याय में देरी का मतलब सिर्फ मुकदमा लंबित रहना नहीं, नागरिक का भरोसा लंबित होना है। उन्होंने कहा कि यह बिल केवल 4 पद बढ़ाने का नहीं है, यह न्याय देने की संस्थागत क्षमता बढ़ाने का कदम है। संविधान पीठों का नियमित गठन आसान होने से संवैधानिक महत्व के मामलों की सुनवाई भी तेज होगी।

अंत में उन्होंने कहा कि न्याय का रास्ता नागरिक की जेब और दूरी से तय नहीं होना चाहिए। टेली लॉ के जरिए 776 जिलों और ढाई लाख ग्राम पंचायतों तक 1.12 करोड़ से अधिक पूर्व परामर्श पहुंचाए गए हैं। “धर्मो रक्षति रक्षितः” का उल्लेख करते हुए डॉ. बंसल ने कहा कि न्यायपालिका जितनी मजबूत होगी, संविधान उतना मजबूत होगा और संविधान मजबूत होगा तो नागरिक उतना सुरक्षित होगा।

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