

चार्जशीट कमेटी अध्यक्ष करन माहरा का आरोप—7,000 बीघा सरकारी जमीन की 90 साल की लीज पर सवाल, जॉर्ज एवरेस्ट व अस्पताल भू-आवंटन भी घेरे में
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने धामी सरकार पर सरकारी भूमि को कथित तौर पर ‘कौड़ियों के भाव’ बेचने का आरोप लगाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया है। शनिवार को देहरादून के होटल इन्द्रलोक में आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रदेश कांग्रेस चार्जशीट कमेटी के अध्यक्ष करन माहरा ने सीधे शब्दों में कहा कि “मुख्यमंत्री नाम के, प्रॉपर्टी डीलर काम के।” वार्ता को प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, सहप्रभारी सुरेंद्र शर्मा, चार्जशीट कमेटी सदस्य मनोज रावत, डॉ. प्रेम बहुखंडी और डॉ. प्रतिमा सिंह ने संयुक्त रूप से संबोधित किया।
7,000 बीघा जमीन पर सवाल
करन माहरा ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड निवेश एवं अवसंरचना विकास बोर्ड (UIIDB) के जरिए उद्यान, पोटैटो प्रोजेक्ट और ब्रीडिंग गार्डन समेत विभिन्न विभागों की करीब 7,000 बीघा सरकारी भूमि को ‘लैंड बैंक’ बनाकर निजी निवेशकों को सौंपा जा रहा है। फाइव-स्टार होटल, लग्जरी रिसॉर्ट, कमर्शियल टाउनशिप और प्राइवेट स्कूल जैसी परियोजनाओं के लिए यह भूमि 90 वर्ष की लीज पर दी जाएगी, जबकि सामान्य वाणिज्यिक लीज 30 वर्ष की होती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब आम नागरिकों के लिए जमीन खरीदने की सीमा 250 वर्ग मीटर है, तो सरकार चुनिंदा कॉर्पोरेट्स को 90 साल के लिए इतनी बड़ी सरकारी जमीन किस नैतिकता के तहत दे रही है? उनका आरोप है कि व्यावसायिक उपयोग वाली इन जमीनों का किराया कृषि भूमि के सर्किल रेट पर तय किया जा रहा है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगेगी। साथ ही लीज की शर्तें—जैसे न्यूनतम ₹500 करोड़ टर्नओवर वाली कंपनी को ही पात्रता, 25 प्रतिशत राशि 30 दिनों में जमा और 75 प्रतिशत 10 वर्षों में, तथा भूमि को आगे सब-लीज करने और बंधक रखकर ऋण लेने की छूट—साफ तौर पर बड़े कॉरपोरेट घरानों के लिए बनाई गई हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यह लीज भविष्य में स्थायी स्वामित्व में बदलने का पिछला दरवाजा हो सकती है और यह निर्णय डेढ़ साल तक जनता से छिपाकर रखा गया।
जॉर्ज एवरेस्ट सौदे पर भी घेरा
नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि एशियाई विकास बैंक के ऋण से विकसित जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की करीब 142 एकड़ सुविधाओं को 15 वर्ष के लिए मात्र ₹1 करोड़ वार्षिक केंद्र पर निजी संचालक को सौंपा गया। उन्होंने बताया कि टेंडर में शामिल तीनों कंपनियों के बीच परस्पर संबंध सामने आए और प्रतिस्पर्धी कंपनियां विजेता कंपनी में शेयरहोल्डर बन गईं। सार्वजनिक सड़क पर टोल वसूली का मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा, जहां वसूली पर रोक लगी।
अस्पताल भू-आवंटन मामले में सिंडिकेट का आरोप
मनोज रावत ने बताया कि अस्पताल निर्माण के लिए चिन्हित करीब 23,137 वर्ग मीटर भूमि का आवंटन स्वास्थ्य विभाग को विश्वास में लिए बिना 25 फरवरी 2025 को रद्द कर दिया गया। उनका आरोप है कि प्रक्रिया से जुड़ी कंपनियों में एक के पास रियल एस्टेट का अनुभव नहीं और दूसरी मूलतः सॉफ्टवेयर फर्म है; नोएडा अथॉरिटी ने सिक्का डेवलपर्स से ₹277 करोड़ की रिकवरी का आदेश जारी किया है और तकनीकी रूप से अयोग्य कंपनी को प्रोविजनल लैंड अलॉटमेंट देना संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन है। पत्रकार वार्ता में प्रदेश महामंत्री (संगठन) राजेंद्र भंडारी और अमरजीत सिंह भी मौजूद रहे।

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