

पहली ही बरसात ने बहा दी सरकारी दावों की नींव, अस्थाई पुलिया धंसने के महज एक दिन बाद बने नए पुल में भी दरार जैसी स्थिति
देहरादून। देहरादून-पांवटा साहिब पुराने राजमार्ग पर टौंस नदी को पार कराने वाला नंदा की चौकी का पुल एक बार फिर सुर्खियों में है, मगर इस बार वजह शर्मनाक है। करोड़ों की लागत से बनकर तैयार हुआ यह पुल यातायात के लिए खुलते ही पहली भारी बारिश की मार नहीं झेल पाया और उसमें बड़ा धंसाव देखने को मिला। सवाल यह उठता है कि जिस पुल को बनाने में जनता का 16 करोड़ रुपया खर्च हुआ, वह आखिर इतनी जल्दी दगा क्यों दे गया?
गौरतलब है कि इसी महीने 11 जुलाई की रात टौंस नदी के उफान ने ह्यूम पाइप के सहारे बनाई गई अस्थाई पुलिया को बहा दिया था, जिससे इलाके का संपर्क पूरी तरह टूट गया था। इस पर लोक निर्माण विभाग ने जल्दबाजी में बाकी बचा काम निपटाकर महज एक दिन के भीतर, यानी 12 जुलाई से ही नवनिर्मित मुख्य पुल पर वाहनों की आवाजाही शुरू करा दी थी। विभाग ने इसे बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया था, लेकिन बमुश्किल कुछ दिनों में ही यह दावा खोखला साबित हो गया।
अब उसी पुल में धंसाव सामने आने से निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर आक्रोश है कि जब पुल का निर्माण इतनी जल्दबाजी में पूरा कराया गया, तो कहीं गुणवत्ता से समझौता तो नहीं हुआ। बार-बार टूटने-धंसने वाला यह मार्ग अब क्षेत्रवासियों के लिए स्थायी सिरदर्द बनता जा रहा है, वहीं जिम्मेदार विभाग हर बार सिर्फ अस्थाई जुगाड़ से काम चलाता नजर आ रहा है।

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