
RSS इतिहास उठाकर कांग्रेस ने पूछा – आपातकाल का रोना रोने वालों, पहले अपना गिरेबां देखो
देहरादून। उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एआईसीसी सदस्य सूर्यकांत धस्माना ने आपातकाल को लेकर भाजपा नेताओं द्वारा दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर लगाए जा रहे आरोपों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि आपातकाल का रोना रोने से राम मंदिर में चोरी, नोटबंदी और जीएसटी से तबाह हुई अर्थव्यवस्था, गुजरात दंगे, पुलवामा-पठानकोट-उड़ी और पहलगाम के आतंकी हमले तथा मणिपुर में नरसंहार जैसे पाप धुलने वाले नहीं हैं।
धस्माना ने भाजपा नेताओं को इतिहास याद दिलाते हुए कहा कि आपातकाल के दौरान जेल में बंद तत्कालीन आरएसएस सरसंघचालक बालासाहेब देवरस ने स्वयं इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर आरएसएस कार्यकर्ताओं की रिहाई के बदले आपातकाल का समर्थन करने का प्रस्ताव दिया था। यही नहीं, उच्चतम न्यायालय द्वारा इंदिरा जी का चुनाव वैध ठहराए जाने पर बालासाहेब ने उन्हें बधाई भी दी थी और यहां तक लिखा था कि आरएसएस का जयप्रकाश नारायण के आंदोलन से कोई सरोकार नहीं है। धस्माना ने सवाल उठाया कि इस पर भाजपा नेताओं को देश को जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि 1977 में इंदिरा गांधी ने स्वयं आपातकाल समाप्त कर आम चुनाव कराए और पराजित होने पर सत्ता की चाबी जनता पार्टी को सौंप दी — जो आपस की लड़ाई में ढाई साल में ही बिखर गई। देश की जनता ने भी इंदिरा जी को ढाई साल में माफ कर पुनः सत्ता सौंप दी। धस्माना ने कहा कि जिस नेता ने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर 98 हजार दुश्मन सैनिकों को घुटनों पर बैठाकर आत्मसमर्पण कराया, उनकी निंदा करना आसान है किंतु उनके आसपास पहुंचना असंभव।

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