
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को GMS रोड के एक होटल में ‘संविधान हत्या दिवस’ पर आयोजित समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने आपातकाल के दौरान लोकतंत्र बचाने के लिए जेल गए सेनानियों और उनके परिजनों को सम्मानित किया।
CM धामी ने कहा कि 25 जून 1975 को देश पर थोपा गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का सबसे काला पन्ना है। तत्कालीन सरकार ने कुर्सी बचाने के लिए जनता की आजादी छीन ली, प्रेस पर पहरे लगा दिए और संविधान की आत्मा को चोट पहुंचाई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज लोकतंत्र जिंदा है तो इसका श्रेय लोकतंत्र सेनानियों के बलिदान, हौसले और संघर्ष को जाता है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरणा देगा। संविधान हमें बोलने की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकार देता है। आपातकाल में इन्हें दबाने की कोशिश हुई, लेकिन जागरूक जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से मुंहतोड़ जवाब दिया।
धामी ने बताया कि राज्य सरकार सेनानियों के सम्मान के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है। 2023 में मासिक सम्मान राशि 16 हजार से बढ़ाकर 20 हजार रुपये कर दी गई। आपातकाल में जेल गए सेनानियों और उनके आश्रित जीवनसाथियों के लिए विशेष पहचान-पत्र भी जारी किए गए हैं।
CM ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ‘सबका साथ, सबका विकास’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ के मंत्र पर चल रहा है। सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण से अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंच रहा है। उन्होंने नई पीढ़ी को सेनानियों के संघर्ष से रूबरू कराने और ‘श्रेष्ठ उत्तराखंड’ बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
समारोह में राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक खजान दास, सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बिष्ट, प्रदेश महामंत्री कुंदन परिहार और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल मौजूद रहे। अंत में सभी सेनानियों के ऐतिहासिक योगदान के प्रति आभार जताया गया।

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