

देहरादून। राजधानी में नशे के बढ़ते जाल को पूरी तरह ध्वस्त करने और अवैध रूप से चल रहे पुनर्वास केंद्रों पर नकेल कसने के लिए जिला प्रशासन ने अपनी रणनीति बेहद सख्त कर दी है। बुधवार को आयोजित जिला स्तरीय नारकोटिक्स को-ऑर्डिनेशन समिति की समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने, शिक्षण संस्थानों में निगरानी बढ़ाने और अवैध केंद्रों पर तत्काल सीलिंग की कार्रवाई के कड़े निर्देश जारी किए।
बैठक के दौरान मोथरोवाला क्षेत्र में बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे एक नशामुक्ति केंद्र की शिकायत मिलते ही जिलाधिकारी ने उसे तत्काल प्रभाव से सीज करने का आदेश दिया। इसके साथ ही उन्होंने सभी उपजिलाधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित पुनर्वास केंद्रों की नियमित जांच करने और उनकी केंद्रीकृत निगरानी के लिए जल्द एक ऑनलाइन डैशबोर्ड विकसित करने का निर्देश दिया, ताकि एक क्लिक पर पारदर्शी मॉनिटरिंग हो सके।
शिक्षण संस्थानों में रैंडम सैंपलिंग व ई-शपथ अनिवार्य नशे के दुष्प्रभावों से युवाओं को बचाने के लिए डीएम ने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में औचक निरीक्षण कर रैंडम सैंपलिंग करने के निर्देश दिए हैं। अभियान के तहत सभी छात्रों से अनिवार्य रूप से एंटी-ड्रग्स ई-शपथ पत्र भरवाया जाएगा और जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
जीआईएस मैपिंग से चिह्नित होंगे हॉटस्पॉट पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे पुराने अपराध आंकड़ों का जीआईएस (GIS) आधारित विश्लेषण कर नशे से संवेदनशील क्षेत्रों और हॉटस्पॉट को चिह्नित करें। इसके अलावा, मेडिकल स्टोरों पर सीसीटीवी कैमरे, दवा रजिस्टर और स्टॉक की नियमित जांच की जाएगी। हॉस्टलों, पीजी (PG) और कोचिंग संस्थानों में भी सीसीटीवी से नजर रखी जाएगी और एंटी-ड्रग्स हेल्पलाइन-1933 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

2026 में अब तक की बड़ी कार्रवाइयां:
- एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act): वर्ष 2026 में अब तक 208 मुकदमे दर्ज कर 237 अभियुक्तों को जेल भेजा जा चुका है।
- सप्लाई चेन पर चोट: धारा 29 के तहत 40 और धारा 27ए के तहत 4 अभियुक्तों पर कार्रवाई हुई है।
- औषधि विभाग का एक्शन: जुलाई 2026 तक 58 औचक निरीक्षण किए गए। नकली दवाओं से जुड़े 4 मामलों में एफआईआर दर्ज कर 2 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
75 बेड का राजकीय नशामुक्ति केंद्र जल्द जिला समाज कल्याण विभाग ने बताया कि रायवाला के समीप प्रस्तावित 75 बेड क्षमता वाले राजकीय नशामुक्ति केंद्र के भवन निर्माण हेतु 775.09 लाख रुपये की डीपीआर भेजी गई है। इसके सापेक्ष भारत सरकार द्वारा पहली किश्त के रूप में 132 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की जा चुकी है।
बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एम.के. शर्मा, सीओ सदर अक्षित कंडारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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