फेरान टोरेस ने 106वें मिनट में गोल दागकर स्पेन को 16 साल बाद विश्व चैंपियन बनाया

न्यूयॉर्क/ईस्ट रदरफोर्ड (अमेरिका), 20 जुलाई 2026। स्पेन की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम ने रविवार को मेटलाइफ स्टेडियम में खेले गए 2026 फीफा विश्व कप फाइनल में अर्जेंटीना को 1–0 से हराकर 16 वर्षों का इंतजार खत्म कर दिया। 2010 के दक्षिण अफ्रीका विश्व कप के बाद पहली बार ला रोखा ने फिर से विश्व फुटबॉल पर अपना दबदबा साबित किया।

निर्णायक गोल फेरान टोरेस ने एक्स्ट्रा टाइम के 106वें मिनट में दागा, जिसने स्पेन को दूसरी बार विश्व चैंपियन बना दिया और मैच का रूख पूरी तरह बदल दिया।पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करने वाली स्पेनिश टीम ने फाइनल में भी अनुशासित रक्षा और धैर्यपूर्ण आक्रमण से दर्शकों का दिल जीत लिया, जबकि उनकी डिफेंस ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ एक गोल खाया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस ऐतिहासिक मुकाबले को देखने के लिए स्टेडियम में मौजूद रहे। वे अपनी पत्नी मेलानिया ट्रंप, फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो और अन्य विश्व नेताओं के साथ वीआईपी गैलरी में बैठे रहे और मैच के समापन पर ट्रॉफी प्रेजेंटेशन समारोह में शामिल हुए। मेटलाइफ स्टेडियम में बैठी हजारों की भीड़ के बीच ट्रॉफी उठाते समय स्पेनिश खिलाड़ियों के लिए यह पल ऐतिहासिक बन गया।

मैच से पहले क्लोजिंग सेरेमनी ने स्टेडियम को रंग और संगीत से भर दिया। पोस्ट मेलोन, टॉम क्रूज, निकोल शेरजिंगर, रोबी विलियम्स, लॉरा पॉसिनी, आईशो स्पीड और जेनिफर हडसन जैसे सितारों ने दर्शकों को रोमांचित किया, जबकि जेनिफर हडसन ने अमेरिकी राष्ट्रगान की यादगार प्रस्तुति दी।यह समापन समारोह 2026 विश्व कप की मेजबानी कर रहे अमेरिका के लिए भी एक भव्य सांस्कृतिक शोकेस साबित हुआ।

हाफटाइम शो (फीफा विश्व कप के इतिहास का पहला बड़ा हाफटाइम शो) भी इस फाइनल की खासियत रहा। क्रिस मार्टिन (कोल्डप्ले) द्वारा क्यूरेटेड इस शो में मैडोना, शकीरा (बर्ना बॉय के साथ), जस्टिन बीबर, बीटीएस, गुस्तावो दुदामेल, PS 22 कोरस फीचरिंग कोल्डप्ले और सैसम स्ट्रीट-मपेट्स के किरदारों ने मंच संभाला।[6] यह शो FIFA Global Citizen Education Fund के लिए फंड जुटाने का माध्यम भी बना, जिसका उद्देश्य बच्चों की शिक्षा और फुटबॉल को बढ़ावा देना है।

टूर्नामेंट में स्पेन का सफर बेहद प्रभावशाली रहा। ग्रुप H में केप वर्डे के साथ ड्रॉ, सऊदी अरब पर बड़ी जीत और उरुग्वे पर सफलता के बाद नॉकआउट चरण में स्पेन ने ऑस्ट्रिया, पुर्तगाल, बेल्जियम और फ्रांस जैसी मजबूत टीमों को हराया। अर्जेंटीना जैसी डिफेंडिंग चैंपियन टीम को फाइनल में मात देकर स्पेन ने साबित किया कि उनकी युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का मिश्रण इस विश्व कप की सबसे संतुलित टीमों में से एक रहा।

कोच लुइस डे ला फुएंते की अगुवाई में टीम ने पूरे टूर्नामेंट में अनुशासित फुटबॉल खेला। युवा सितारों लामिने यामाल, मिकेल ओयार्जाबल और मेरिनो ने आक्रमण में चमक बिखेरी, जबकि रोद्री जैसे अनुभवी खिलाड़ी ने मिडफील्ड में टीम को संतुलन और नियंत्रण प्रदान किया। यह संयोजन ही था जिसने स्पेन को डिफेंसिव तौर पर मजबूत और आक्रमण में रचनात्मक बनाए रखा।

यह जीत स्पेनिश फुटबॉल के स्वर्ण युग की याद दिलाती है, जब 2008 से 2012 के बीच टीम ने लगातार दो यूरो कप और एक विश्व कप अपने नाम किया था। मैड्रिड, बार्सिलोना और सेविया समेत पूरे स्पेन में रात भर जश्न मनाया गया और सड़कों पर प्रशंसकों की भीड़ “कैंपा दो मुंडो” के नारों के बीच जश्न मनाती रही।इस खिताब के साथ स्पेन अब दो विश्व कप (2010 और 2026) जीतने वाली चुनिंदा टीमों की सूची में शामिल हो गया है।

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