धराली आपदा की पहली बरसी: श्रद्धांजलि के साथ पुनर्निर्माण का संकल्प दोहराया 

जिलाधिकारी ने दिवंगतों की याद में किया वृक्षारोपण, ग्रामीणों ने रोपे 101 पौधे

धराली, उत्तरकाशी। धराली-हर्षिल क्षेत्र में बीते वर्ष आई भीषण प्राकृतिक आपदा की पहली बरसी बुधवार को पूरे क्षेत्र में गम और संकल्प के साथ मनाई गई। धराली में श्रद्धांजलि सभा, शांति पाठ और सामूहिक प्रार्थना का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर आपदा में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि सरकार का लक्ष्य अब धराली को पहले से अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाना है।

कार्यक्रम की शुरुआत सोमेश्वर देवता की पूजा के साथ हुई। इसके बाद दिवंगतों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा गया। कल्प केदार मंदिर समिति और समस्त ग्रामवासियों ने इस अवसर पर जिलाधिकारी को कल्प केदार मंदिर के जीर्णोद्धार, मरम्मत और सौंदर्यीकरण का प्रस्ताव सौंपा।

जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि शासन से वार्ता और निर्देश प्राप्त होने के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले ही ग्रामीणों को मंदिर के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दे चुके हैं।

श्रद्धांजलि के प्रतीक के रूप में जिलाधिकारी ने देवदार का पौधा रोपा। वहीं ग्रामीणों ने आपदा में बिछड़े अपने लोगों की याद में 101 पौधे लगाने का संकल्प पूरा किया।

जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने कहा कि बीते एक वर्ष में जिला प्रशासन ने राहत तक खुद को सीमित नहीं रखा। पुनर्वास, आवासीय सहायता, आजीविका पुनर्स्थापन, पर्यटन और स्थानीय व्यापार को फिर से खड़ा करने के लिए समन्वित प्रयास किए गए। कृषि, बागवानी, सड़क, विद्युत, पेयजल और संचार जैसी मूलभूत सेवाएं प्राथमिकता से बहाल की गईं, जिससे क्षेत्र में जनजीवन सामान्य हुआ।

उन्होंने प्रभावित परिवारों से सीधा संवाद कर उनकी कुशलक्षेम जानी। उन्होंने कहा, _“धराली की त्रासदी केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं थी, यह पूरे जनपद के लिए भावनात्मक और चुनौतीपूर्ण समय था। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में हमने यह सुनिश्चित किया कि कोई भी परिवार खुद को अकेला महसूस न करे।”_

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि अब फोकस सिर्फ पुनर्निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा पर है। इसके तहत नदी तटों की सुरक्षा, चैनलाइजेशन, संवेदनशील स्थानों का उपचार, सड़कों का सुदृढ़ीकरण और अन्य आपदा न्यूनीकरण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।

साथ ही कृषि, उद्यान, पशुपालन, ग्राम्य विकास और पर्यटन विभागों के माध्यम से स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के प्रयास जारी हैं, ताकि धराली फिर से आत्मनिर्भर और समृद्ध बन सके।

उन्होंने कहा, _“यह बरसी केवल दुख याद करने का दिन नहीं है। यह उन लोगों के साहस और धैर्य को नमन करने का अवसर है जिन्होंने कठिन समय में हार नहीं मानी। हमारा संकल्प है कि धराली को पहले से अधिक सुरक्षित, सुदृढ़ और विकसित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया जाए।”_

इस अवसर पर उपजिलाधिकारी भटवाड़ी शालिनी नेगी, थानाध्यक्ष हर्षिल प्रदीप तोमर, डीडीएमओ शार्दुल गुसाईं, ग्राम प्रधान धराली अजय नेगी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

समूचे आयोजन में गम के साथ उम्मीद भी दिखी – बीते कल को याद करते हुए, आने वाले कल को बेहतर बनाने का संकल्प।

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