VIP ऑडियो-वीडियो विवाद में पूर्व विधायक सुरेश राठौर को झटका, हाईकोर्ट सख्त – सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

नैनीताल। अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित ‘VIP’ ऑडियो-वीडियो विवाद में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर को उत्तराखंड हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर अंतरिम संरक्षण देने से साफ इनकार कर दिया है और राज्य सरकार से विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट तलब की है।

न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए कि वे 8 जुलाई 2026 तक मामले की पूरी स्थिति रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत करें। इसी दिन अगली सुनवाई भी निर्धारित की गई है।

दरअसल, गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए सुरेश राठौर ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे राजनीतिक द्वेष के तहत दर्ज किए गए हैं। बचाव पक्ष के अनुसार देहरादून के डालनवाला और नेहरू कॉलोनी थानों में दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं, जबकि हरिद्वार में दर्ज दो मामलों को हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि पुलिस सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रही, जिससे गिरफ्तारी की आशंका बनी हुई है।

मामले की जड़ में अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़ा वह विवाद है, जिसमें आरोप है कि सुरेश राठौर ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक कथित ‘VIP’ के नाम पर आपत्तिजनक ऑडियो और वीडियो क्लिप प्रसारित की थीं। इन सामग्रियों के जरिए शिकायतकर्ता आरती गौड़ और भाजपा के राष्ट्रीय नेता दुष्यंत गौतम को इस मामले से जोड़ने की कोशिश का आरोप है, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा।

हालांकि हाईकोर्ट पूर्व में हरिद्वार से जुड़े मामलों को समाप्त कर चुका है, लेकिन देहरादून में दर्ज मामलों में पुलिस को निष्पक्ष और गहन जांच के निर्देश दिए गए हैं। अदालत ने इस प्रकरण में सोशल मीडिया के दुरुपयोग को लेकर भी कड़ा रुख अपनाया है।

कोर्ट ने पूर्व सुनवाई में स्पष्ट किया था कि बिना ठोस साक्ष्यों के किसी व्यक्ति को गंभीर अपराध से जोड़कर उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यदि किसी के पास साक्ष्य हैं तो उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने के बजाय जांच एजेंसियों को सौंपना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग किसी की छवि खराब करने या राजनीतिक साजिश के औजार के रूप में नहीं किया जा सकता।

अब इस पूरे मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी, जहां सरकार की स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर अदालत सुरेश राठौर की अग्रिम जमानत याचिका पर आगे निर्णय ले सकती है।

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