

देहरादून। उत्तराखंड में नीट-यूजी 2026 काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिए एमबीबीएस में दाखिला लेने का बड़ा मामला सामने आया है। जांच में खुलासा होने के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा (एचएनबी) चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय ने चार छात्राओं के एमबीबीएस प्रवेश रद्द कर दिए हैं। साथ ही पुलिस ने चार छात्राओं और एक अभिभावक समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
मामला देहरादून में प्रकाश में आया। शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी आशीष चौहान ने मुख्य विकास अधिकारी और अपर जिलाधिकारी की संयुक्त जांच समिति गठित की। जांच में पता चला कि तृप्ति, खुशी, परी और स्वाति नाम की चार छात्राओं ने धर्मवीर वर्मा (पुत्र खजान सिंह) नाम के एक ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम का परिचय पत्र लगाकर आश्रित कोटे का लाभ लिया था। जिला प्रशासन के राजस्व रिकॉर्ड में इस नाम का कोई प्रमाण नहीं मिला। दिए गए पते (राजीवनगर, तरली कंडोली आदि) पर शारीरिक सत्यापन के दौरान अभ्यर्थी और परिवार नहीं मिले। शपथ पत्र अधूरे पाए गए और दस्तावेज संदिग्ध निकले।
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने चारों फर्जी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिए। एसडीएम सदर अपूर्वा सिंह ने इसके आदेश जारी किए। इसके बाद एचएनबी मेडिकल एजुकेशन यूनिवर्सिटी और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने चारों छात्राओं के एमबीबीएस दाखिले रद्द कर दिए। चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सायाना ने पुष्टि की कि जिला प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर प्रवेश निरस्त किए गए हैं और सीटें रिक्त मानकर आगे की काउंसलिंग में शामिल की जाएंगी।
पुलिस कार्रवाई में क्लेमेंट टाउन थाने में तृप्ति और उसकी मां उमा देवी (या उषा देवी) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। रायपुर थाने में खुशी, परी और स्वाति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। आरोप है कि फर्जी आधार कार्ड, शपथ पत्र और गलत पते के दस्तावेजों के जरिए सरकारी पोर्टल पर आवेदन कर स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाण पत्र हासिल किए गए और एमबीबीएस सीट का लाभ लिया गया। मुकदमे भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में दर्ज हैं।
मामले में स्वतंत्रता सेनानी परिवार से जुड़े प्रदीप बहुगुणा (सुंदरलाल बहुगुणा के पुत्र) की शिकायत का भी जिक्र है। उन्होंने कई प्रमाण पत्रों में समानता और संदेह जताया था। स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में कुल नौ एमबीबीएस सीटें आवंटित हुई थीं, जिनमें से चार पर फर्जीवाड़ा सामने आया। अब शिकायतकर्ता उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी में हैं। जांच का दायरा पटवारी, एसडीएम और प्रमाण पत्र जारी करने वाले तंत्र तक फैलने की संभावना है।
यह घटना मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण कोटे के दुरुपयोग को उजागर करती है। प्रशासन और पुलिस आगे की जांच कर रही है।

Recent Comments