गैरसैंण स्थायी राजधानी आंदोलन: 97 दिन बाद भी सत्ता की नींद नहीं टूटी, 15 अगस्त से महा-पदयात्रा का ऐलान

देहरादून से गैरसैंण तक पैदल मार्च की तैयारी, धरना स्थल पर सांप निकलने से आंदोलनकारियों में रोष

देहरादून । उत्तराखंड को स्वतंत्र राज्य बने ढाई दशक से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन स्थायी राजधानी का सवाल आज भी अनुत्तरित है। गैरसैंण को संवैधानिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर 8 मार्च से जारी क्रमिक अनशन गुरुवार को अपने 97वें दिन में प्रवेश कर गया। स्थाई राजधानी गैरसैण समिति के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे अवधेश शर्मा अनशन पर डटे हैं और उनका कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं होती, यह सत्याग्रह जारी रहेगा।

पूर्व आईएएस अधिकारी विनोद प्रसाद रतूड़ी के नेतृत्व में संचालित इस आंदोलन ने अब एक बड़े कदम की घोषणा की है। समिति ने 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देहरादून से गैरसैंण तक महा-पदयात्रा निकालने का निर्णय लिया है। समिति का मानना है कि इस पदयात्रा से राज्यभर में जन-जागरण होगा और सरकार पर दबाव बनेगा।

इस बीच, धरना स्थल एकता विहार की दुर्दशा ने आंदोलनकारियों का गुस्सा और भड़का दिया है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार ने जानबूझकर इस स्थल को उपेक्षित छोड़ा है। हाल ही में धरना स्थल पर एक जहरीला सांप निकला और कुछ दिन पूर्व सांप के बच्चे भी देखे गए। सफाई व्यवस्था इतनी बदतर है कि समिति के कार्यकर्ताओं को स्वयं झाड़ू उठाकर सफाई करनी पड़ रही है।

समिति ने राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि यह आंदोलन अब महज एक मांग नहीं, बल्कि उत्तराखंड के स्वाभिमान की लड़ाई बन चुका है। सड़क से लेकर सदन तक, आवाज बुलंद की जाएगी।

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