
देहरादून । यूनिवर्सिटीज़ जर्नल ऑफ फाइटोकेमिस्ट्री एंड आयुर्वेदिक हेल्थ की ओर से शनिवार को यूकॉस्ट परिसर में फाइटोकेमिस्ट्री और आयुर्वेद विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. तबस्सुम नकवी ने किया। वक्ताओं ने आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं में आयुर्वेद और औषधीय पौधों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डालते हुए वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
सेमिनार में यूजेपीएएच के मुख्य संपादक एवं एचडब्ल्यूसी (देहरादून इकाई) के अध्यक्ष डॉ. एस. फारूक ने जड़ी-बूटियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और एंटीमाइक्रोबियल गुणों की उपयोगिता पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि औषधीय पौधों से प्राप्त एंटीऑक्सीडेंट जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की रोकथाम एवं नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्य वक्ता यूकॉस्ट के महानिदेशक डॉ. दुर्गेश पंत ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समन्वय से हर्बल दवाओं की प्रभावशीलता बढ़ाई जा सकती है। इससे पुरानी और जीवनशैली से जुड़ी अनेक बीमारियों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में नई संभावनाएं खुलेंगी।
विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के कुलपति डॉ. ए.के. त्रिपाठी ने आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था में आयुर्वेदिक औषधियों की उपयोगिता और वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया। मुख्य अतिथि प्रो. तबस्सुम नकवी ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां आज भी प्रासंगिक हैं और आयुर्वेद के माध्यम से कई दीर्घकालिक बीमारियों का प्रभावी प्रबंधन संभव है।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. आई.पी. सक्सेना ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस दौरान असम विश्वविद्यालय, ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय, उत्तरांचल विश्वविद्यालय और डॉल्फिन इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल एंड नेचुरल साइंसेज, देहरादून के सफल छात्र प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र भी वितरित किए गए।

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