
नैनीताल:उत्तराखंड हाईकोर्ट ने बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों पुलकित आर्या और सौरभ भास्कर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। मंगलवार (30 जून 2026) को हुई सुनवाई में न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने आरोपियों को कोई राहत नहीं दी और मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को तय की।
सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
- आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि अंकिता भंडारी ने आत्महत्या की थी और उनकी कोई संलिप्तता नहीं है, इसलिए उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए।
- पीड़ित पक्ष और सरकार की ओर से जोर दिया गया कि घटना के बाद रिसॉर्ट के कमरे को तोड़ दिया गया, बुलडोजर चलाया गया और आगजनी कर सबूत मिटा दिए गए। WhatsApp चैट भी आरोपियों के खिलाफ थे। अगर उनका कोई हाथ नहीं था तो सबूत क्यों नष्ट किए गए? केस की पृष्ठभूमि
पौड़ी जिले की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी वनंतरा रिसॉर्ट (ऋषिकेश के पास) में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थी। सितंबर 2022 में कथित तौर पर बलात्कार के बाद उसकी हत्या कर चीला बैराज में शव फेंक दिया गया था। - 30 मई 2025 को कोटद्वार सत्र न्यायालय ने पुलकित आर्या (रिसॉर्ट मालिक), सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को IPC की धारा 302 (हत्या), 354A (यौन उत्पीड़न) और 201 (सबूत नष्ट करना) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
- तीनों आरोपी फिलहाल जेल में हैं। अभियोजन पक्ष ने 47 गवाह पेश किए थे। फॉरेंसिक रिपोर्ट, लोकेशन डेटा और WhatsApp चैट जैसे सबूतों पर केस मजबूत माना गया।
अंकिता के परिवार ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में मृत्युदंड की मांग की थी। यह मामला उत्तराखंड में काफी संवेदनशील रहा है और न्याय की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन होते रहे हैं।

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