

देहरादून। उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) को 7,000 बीघा भूमि आवंटित किए जाने की खबरों को राज्य सरकार ने खारिज कर दिया है। प्रमुख सचिव नियोजन एवं यूआईआईडीबी के प्रबंध निदेशक आर. मीनाक्षी सुंदरम ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है। अब तक चिन्हित भूमि में से बोर्ड को मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है। न तो बोर्ड को इतनी बड़ी भूमि दी गई है और न ही प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया संचालित है।
श्री सुंदरम ने कहा कि हाल के दिनों में कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों और सार्वजनिक मंचों पर बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर जो सवाल उठाए गए हैं, उससे जनता में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई है। ऐसे में तथ्यात्मक जानकारी सामने रखना आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि यूआईआईडीबी का गठन राज्य में पूंजी निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार के अवसर सृजित करने और सरकारी भूमि एवं संसाधनों के सुनियोजित आर्थिक उपयोग के उद्देश्य से किया गया है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना करना है। इन्वेस्टर समिट में प्राप्त निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों को उपयुक्त भूमि और आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना आवश्यक है।
प्रमुख सचिव ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र में सिडकुल की भांति यूआईआईडीबी पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण निवेश आकर्षित करेगा। उत्तराखंड को प्रमुख पर्यटन एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं, जिससे जयपुर और उदयपुर की तर्ज पर स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ मिल सकेगा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड के माध्यम से भूमि का विक्रय नहीं किया जाएगा। भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा और निर्धारित नियमों के तहत 60 वर्ष की लीज पर उपयोग होगा। कुछ लोगों द्वारा फैलाई जा रही 90 वर्ष की लीज की बात पूरी तरह गलत है। यूआईआईडीबी की ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी से तुलना भी उचित नहीं है, क्योंकि यह 2022 में गठित अलग व्यवस्था है।
सरकार का मानना है कि सेवा क्षेत्र में निवेश से स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और उन्हें उच्च शिक्षा के लिए अन्य राज्यों का रुख नहीं करना पड़ेगा। बोर्ड की सभी प्रक्रियाएं पारदर्शिता और नियमानुसार संचालित की जा रही हैं।

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