

गरिमा मेहरा दसौनी का आरोप—16 दिन में धंसी एप्रोच रोड ने खोली निर्माण गुणवत्ता की पोल, स्वतंत्र तकनीकी जांच और पूरी टेंडर प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग
देहरादून। नंदा की चौकी स्थित टौंस नदी पर करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित पुल की एप्रोच रोड पहली ही बड़ी बारिश में धंसने के मामले को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता, टेंडर प्रक्रिया और संभावित हितों के टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट) की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
दसौनी ने मंगलवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि जिस पुल पर 12 जुलाई से यातायात शुरू हुआ था, उसकी एप्रोच रोड 28 जुलाई को धंस गई, जिसकी पुष्टि प्रशासन भी कर चुका है। उन्होंने कहा कि महज 16 दिन में सड़क धंस जाना निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

कांग्रेस ने दावा किया कि सार्वजनिक अभिलेखों के अनुसार एम/एस हिमालयन कंस्ट्रक्शन नामक फर्म में रुचि भट्ट की 25 प्रतिशत, नितिन कुमार गर्ग की 50 प्रतिशत तथा अखिलेश कुमार भट्ट की 25 प्रतिशत हिस्सेदारी दर्ज है। वहीं एम/एस दून एसोसिएट्स में अरविंद कुमार भट्ट, अरविंद कुमार गर्ग और वैभव गर्ग की साझेदारी का भी उल्लेख है।
गरिमा मेहरा दसौनी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का दावा नहीं कर रही है, लेकिन जब करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हों और संबंधित दस्तावेजों में सत्तारूढ़ भाजपा की प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष से जुड़ी हिस्सेदारी सामने आए, तब जनता को जवाब मिलना आवश्यक है।
उन्होंने भाजपा और संबंधित पक्षों के सामने सात प्रमुख सवाल रखे। इनमें एम/एस हिमालयन कंस्ट्रक्शन में रुचि भट्ट की हिस्सेदारी की स्थिति स्पष्ट करने, संभावित हितों के टकराव की जानकारी सार्वजनिक करने, परियोजना का ठेका किसे और किस प्रक्रिया से मिला, डिजाइन, मिट्टी परीक्षण, ड्रेनेज एवं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच किसने की, पुल को सुरक्षित घोषित करने वाले अधिकारियों की जानकारी, एप्रोच रोड धंसने की जिम्मेदारी तय करने तथा पूरी टेंडर, भुगतान और गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग शामिल है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि जो पार्टी लगातार परिवारवाद और भाई-भतीजावाद पर सवाल उठाती रही है, उसे अब स्पष्ट करना चाहिए कि क्या उसकी सरकार में सरकारी ठेके योग्यता के आधार पर दिए जा रहे हैं या “अपने लोगों” को लाभ पहुंचाने के लिए। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक पदाधिकारी से जुड़ी फर्मों को सरकारी परियोजनाओं में ठेके मिलते हैं तो पारदर्शिता और निष्पक्षता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
दसौनी ने कहा कि कांग्रेस किसी के व्यवसाय करने के अधिकार का विरोध नहीं कर रही, बल्कि यह जानना चाहती है कि सरकारी धन से बनने वाली परियोजनाओं में निर्धारित नियमों, पारदर्शिता और हितों के टकराव संबंधी प्रावधानों का पालन हुआ या नहीं।
उन्होंने नंदा की चौकी परियोजना की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि केवल खानापूर्ति वाली मरम्मत से काम नहीं चलेगा। जांच में यह स्पष्ट होना चाहिए कि एप्रोच रोड के नीचे की मिट्टी क्यों बही, ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त थी या नहीं तथा निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ था या नहीं।

दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड में भारी बारिश सामान्य स्थिति है, इसलिए इसे निर्माण की खामियों से बचने का बहाना नहीं बनाया जा सकता। यदि निर्माण गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुई है तो स्वतंत्र जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा, लेकिन यदि लापरवाही सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ जनता के धन की भरपाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि 16 करोड़ रुपये जनता के टैक्स का पैसा है और जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उसका पैसा किसे, किस प्रक्रिया से और किस गुणवत्ता के कार्य के लिए दिया गया। कांग्रेस ने भाजपा नेतृत्व और रुचि भट्ट से दस्तावेजों के आधार पर लगाए गए सवालों का सार्वजनिक जवाब देने की मांग की है।

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