

दिव्यांगों और बुजुर्गों को भूतल पर प्राथमिकता, CM धामी की संवेदनशील सोच का उदाहरण
देहरादून। गुरुवार को देहरादून के 232 गरीब परिवारों के जीवन में एक नया अध्याय शुरू हुआ। इन परिवारों को वह चीज मिल गई, जिसका वे वर्षों से इंतजार कर रहे थे — अपना पक्का घर। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) ने धौलास आवासीय योजना के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के 232 EWS लाभार्थियों को फ्लैट आवंटित किए। यह केवल एक अनुभव नहीं था, बल्कि उन परिवारों के जीवन में सम्मान, सुरक्षा और स्थायित्व का नया अध्याय था।
हर परिवार का एक सपना होता है — अपना घर। वह घर, जहां बच्चों की हंसी गूंजे, बुजुर्ग निश्चिंत होकर जीवन बिताएं और भविष्य सुरक्षित महसूस हो। ISBT स्थित सिटी जंक्शन मॉल में आयोजित कार्यक्रम में पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ 232 लाभार्थियों को भवन संख्या आवंटित किए गए। लॉटरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल थी और लाभार्थियों की मौजूदगी में संपन्न की गई। इससे यह साफ संदेश गया कि यह कोई खेल-तमाशा नहीं, बल्कि हर निर्णय में न्याय और विश्वास है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार “हर पात्र परिवार को अपना घर” उपलब्ध कराने के लक्ष्य पर लगातार आगे बढ़ रही है। CM धामी ने कहा कि राज्य सरकार प्रत्येक योग्य एवं पात्र नागरिक को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र के अनुरूप हम प्रत्येक पात्र परिवार तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए कार्यरत हैं,” उन्होंने कहा।
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की मजबूत नींव है।” धौलास आवासीय योजना के तहत 232 परिवारों को फ्लैट आवंटन सरकार की जनकल्याणकारी सोच और समावेशी विकास नीति का सशक्त उदाहरण है। CM ने यह भी कहा कि भविष्य में भी आमजन के हित में ऐसी जनकल्याणकारी योजनाएं निरंतर लाई जाती रहेंगी, ताकि कोई भी पात्र परिवार अपने घर के सपने से वंचित न रहे।
इस आवंटन की सबसे भावुक और संवेदनशील बात यह थी कि MDDA ने चार दिव्यांग लाभार्थियों और दो वरिष्ठ नागरिकों को भूतल पर फ्लैट दिए। यह निर्णय केवल प्रशासनिक व्यवस्था नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं का सुंदर उदाहरण बना। इससे स्पष्ट संदेश गया कि विकास तभी सार्थक है, जब उसमें समाज के सबसे जरूरतमंद वर्ग की सुविधा और सम्मान को प्राथमिकता मिले। सीढ़ियों के साथ संघर्ष करने वाले दिव्यांग नागरिकों को भूतल पर फ्लैट देना — यह तो सरकार की संवेदनशीलता की असली परिभाषा है।
MDDA सचिव मोहन सिंह बर्निया ने कहा कि फ्लैट आवंटन की पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों एवं पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न की गई। “सभी 232 लाभार्थियों को कंप्यूटरीकृत लॉटरी प्रणाली के माध्यम से भवन संख्या आवंटित किया गया। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश नहीं रही,” उन्होंने स्पष्ट किया।
MDDA के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कहा कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल भवन निर्माण नहीं है, बल्कि जरूरतमंद परिवारों को सम्मानजनक जीवन के लिए गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध कराना है। “पूरी लॉटरी प्रक्रिया डिजिटल, निष्पक्ष और सभी लाभार्थियों की उपस्थिति में संपन्न की गई, जिससे प्रत्येक आवंटन पूरी तरह विश्वसनीय रहा। हम भविष्य में भी जनकल्याण, पारदर्शिता और गुणवत्तापूर्ण विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे,” तिवारी ने कहा।
धौलास आवासीय योजना केवल चार दीवारों का निर्माण नहीं है। यह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सुरक्षित, आधुनिक और व्यवस्थित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराने की व्यापक पहल है। बेहतर नागरिक सुविधाओं से युक्त यह परियोजना लाभार्थियों को जीवन की नई शुरुआत का अवसर दे रही है। ये फ्लैट न केवल रहने के लिए एक जगह हैं, बल्कि परिवारों के भविष्य की सुरक्षा की नींव हैं।
फ्लैट आवंटन के दौरान लाभार्थियों के चेहरों पर जो खुशी, संतोष और आत्मविश्वास दिखाई दिया, वह शब्दों में बयां करना मुश्किल है। वर्षों का इंतजार खत्म होने की खुशी कई परिवारों की आंखों में झलक रही थी। बुजुर्ग माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को सुरक्षित देख मुस्कुरा रहे थे। दिव्यांग नागरिक अपने सम्मान का एहसास कर रहे थे। हर चेहरा एक नई कहानी बयां कर रहा था — अपने घर का सपना आखिरकार सच हो गया।
यह 232 परिवारों तक सीमित नहीं है। यह एक संदेश है कि जब सरकार जनता के साथ सही तरीके से खड़ी हो, तो ऐसी अद्भुत योजनाएं संभव हैं। CM धामी की सरकार यह साबित करना चाहती है कि विकास में कोई भी छूटा हुआ नहीं होता, कोई भी अधिकार विहीन नहीं होता। हर पात्र परिवार को अपना घर देना — यह तो असली विकास का अर्थ है।

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