
देहरादून। विद्यालयी शिक्षा विभाग में 30 जून को प्रभारी निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती के सेवानिवृत्त होने के साथ ही नए निदेशक की कुर्सी के लिए जोड़तोड़ शुरू हो गई है। प्राथमिक और माध्यमिक दोनों शिक्षा निदेशालय फिलहाल प्रभारी व्यवस्था के तहत चल रहे हैं और इनका प्रभार डॉ. सती के पास है। उनके रिटायरमेंट के बाद आधा दर्जन अपर निदेशक इस पद की दौड़ में शामिल हैं।
विभाग में वर्तमान में वंदना गब्र्याल एकमात्र नियमित निदेशक हैं, जिनके पास एससीईआरटी की जिम्मेदारी है। उनके अलावा उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद के सचिव विनोद प्रसाद सेमल्टी, अपर निदेशक गजेन्द्र सिंह सोन, कुंवर सिंह रावत, पदमेन्द्र सकलानी और परमेन्द्र कुमार वरिष्ठता सूची में हैं। इन पांचों अधिकारियों की निदेशक पद के लिए अभी तक डीपीसी नहीं हुई है। अब फैसला सरकार और विभागीय मंत्री को करना है कि वंदना गब्र्याल को जिम्मेदारी दी जाए या इन पांच अपर निदेशकों में से किन्हीं दो को प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा का जिम्मा सौंपा जाए।
लंबे समय से दोनों निदेशालयों में नियमित निदेशक की तैनाती नहीं हुई है। ऐसे में संभावना है कि आगे भी प्रभारी व्यवस्था ही चलती रहे। सूत्रों के मुताबिक निदेशक पद के लिए अपर निदेशकों के बीच लॉबिंग तेज हो गई है।
सूत्रों का कहना है कि प्रभारी निदेशक डॉ. मुकुल सती सेवा विस्तार के लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शासन से लेकर भाजपा नेताओं तक संपर्क कर रहे हैं। हालांकि विभाग में सेवा विस्तार की कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। डॉ. सती पर पूर्व में हल्द्वानी के एक अशासकीय विद्यालय में सेवा के दौरान संस्थागत छात्र के रूप में अल्मोड़ा कैंपस से बीएड की डिग्री हासिल करने का आरोप है। इस मामले की शासन स्तर पर जांच चल रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं हुआ है। इसको लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है।
वहीं डॉ. सती अपने अधीनस्थों से पूरे विश्वास के साथ कह रहे हैं कि उन्हें सेवा विस्तार मिलना तय है। विभाग में चर्चा है कि उनके अधिकतर अधीनस्थ उनकी कार्यशैली से नाराज हैं और उनके रिटायरमेंट का इंतजार कर रहे हैं।

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