

पौड़ी। उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में पिछले कुछ हफ्तों से चल रही उठापटक अब सीधे 2027 के चुनावी मैदान की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। उत्तराखंड क्रांति दल से निष्कासन के बाद आशुतोष नेगी ने अब उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक (UKD-D) के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है। रविवार को पौड़ी में हुई संगठनात्मक बैठक में पार्टी ने जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर संगठन खड़ा करने और अधिकतम सीटों पर जीत का लक्ष्य घोषित कर दिया।
यह महज संगठन विस्तार की बैठक नहीं थी। इसके पीछे हाल के राजनीतिक घटनाक्रम की पूरी पृष्ठभूमि भी दिखाई दी। अगस्त में उक्रांद की केंद्रीय अनुशासन समिति द्वारा आशुतोष नेगी को छह वर्ष के लिए पार्टी से निष्कासित किए जाने की खबर सामने आई थी। इसके बाद नेगी ने क्षेत्रीय दलों को एक मंच पर लाने की पहल करते हुए उत्तराखंड डेमोक्रेटिक एलायंस की घोषणा की और स्वयं को उसकी राजनीतिक कवायद के केंद्र में रखा।
रविवार को गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी स्थित मंडलीय कार्यालय में हुई बैठक में ब्लॉक और जिला स्तर की कार्यकारिणियों का गठन किया गया। बैठक की अध्यक्षता दल के केंद्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आशुतोष नेगी ने की, जबकि संचालन केंद्रीय महामंत्री संगठन ऋषभ नेगी ने किया।
बैठक में नेगी ने उक्रांद के दूसरे धड़े से सीधे टकराव की भाषा के बजाय क्षेत्रीय दलों की एकजुटता की बात कही। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल कुकरेती के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से उनका कोई मनभेद नहीं है और क्षेत्रीय विचारधारा को मजबूत करने के लिए सभी क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का प्रयास किया जाएगा।
लेकिन राजनीतिक गणित का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा पौड़ी की छह विधानसभा सीटों को लेकर सामने आया। पार्टी ने साफ किया कि 2027 में पौड़ी जिले की सभी छह सीटों पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के साथ अधिकतम सीटें जीतने के लिए संगठन को बूथ और विधानसभा स्तर तक मजबूत किया जाएगा। प्रत्याशी चयन में भी क्षेत्रीय राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों से सलाह-मशविरा करने की बात कही गई है। यानी उक्रांद से अलग हुई राजनीतिक राह अब सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि चुनावी संगठन खड़ा करने की दिशा में बढ़ रही है।
इस बीच उक्रांद के भीतर भी पिछले दिनों संगठनात्मक विवादों ने खूब सुर्खियां बटोरीं। कथित ऑडियो को लेकर पार्टी नेतृत्व और आशुतोष नेगी के बीच बातचीत को लेकर सवाल उठे, हालांकि उस ऑडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वहीं सितंबर की शुरुआत में सामने आई एक प्रस्तावित 36 सीटों की सूची में निष्कासित आशुतोष नेगी का नाम होने की चर्चा ने भी पार्टी के भीतर चल रहे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया था।
बैठक में मेजर संतोष भंडारी के दल से जुड़ने की जानकारी देते हुए महिला संगठन को विस्तार देने का दावा किया गया। वहीं गढ़वाल मंडल प्रभारी अर्जुन नेगी ने मंडल के प्रत्येक जिले में संगठन खड़ा करने का संकल्प जताया। पौड़ी जिलाध्यक्ष गौरव चंदोला को जिले की छह विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बैठक में बिजली के खंभे को पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में प्रचारित करते हुए ऊर्जा प्रदेश की जनता को मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। हालांकि, इस पूरी कवायद का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल यही है कि उत्तराखंड में क्षेत्रीय राजनीति के नाम पर पहले से मौजूद कई दावेदारों के बीच यह नया धड़ा अपनी अलग पहचान कितनी मजबूती से बना पाता है।
एक तरफ उक्रांद अपने पुराने मुद्दों जल, जंगल, जमीन और क्षेत्रीय अधिकारों को लेकर सक्रिय है। हाल ही में पार्टी ने राज्य की करीब सात हजार बीघा भूमि को UIIDB के अधीन किए जाने के मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते हुए 21 सितंबर को प्रदेशभर में ज्ञापन देने का कार्यक्रम घोषित किया है। दूसरी ओर किसाऊ बांध जैसे मुद्दों पर भी उक्रांद आंदोलन की चेतावनी दे रहा है।ऐसे में 2027 की लड़ाई केवल भाजपा-कांग्रेस के बीच की लड़ाई नहीं रहने वाली क्षेत्रीय राजनीति के भीतर भी कई दावेदार अपनी-अपनी जमीन तलाश रहे हैं।
पौड़ी की छह विधानसभा सीटों से शुरू हुई आशुतोष नेगी और उत्तराखंड क्रांति दल डेमोक्रेटिक की यह कवायद आगे कितनी सीटों तक पहुंचती है, यह आने वाला समय बताएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि उक्रांद से अलगाव के बाद नेगी ने पीछे हटने के बजाय नई राजनीतिक पारी का रास्ता चुन लिया है और पौड़ी से उसका चुनावी बिगुल भी बज चुका है।

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