महासू धाम हनोल में स्वर्ण कलश स्थापना के बाद बंद होगी सदियों पुरानी पशु बलि प्रथा, 19 नवंबर को होगा अनुष्ठान

हनोल (देहरादून) । महासू मंदिर हनोल में स्वर्ण कलश स्थापना के बाद पशु बलि की परंपरा पूरी तरह बंद कर दी जाएगी। रविवार को मंदिर परिसर में स्थानीय हक-हकूकधारियों, मंदिर प्रबंधन समिति और क्षेत्रवासियों की बैठक में यह ऐतिहासिक निर्णय लिया गया।

बैठक में तय हुआ कि देवता की आज्ञा के अनुसार 19 नवंबर को मंदिर के शिखर पर स्वर्ण कलश स्थापित किया जाएगा। 20 और 21 नवंबर को हवन-यज्ञ, पूजा-अर्चना और विशाल भंडारे का आयोजन होगा।

मंदिर प्रबंधन समिति के मुख्य संरक्षक और शांठीबिल के बजीर दीवान सिंह राणा व विशिष्ट सदस्य स्याणा चमन सिंह चौहान की अध्यक्षता में कार्यक्रम की रूपरेखा बनी। समिति ने स्पष्ट किया कि कलश स्थापना के बाद मंदिर में बकरों की बलि या घांडवा चढ़ाने की परंपरा पूरी तरह बंद होगी। घरों में देवता के डोरिये के साथ पूजन में भी किसी प्रकार की पशुबलि नहीं दी जाएगी।

समिति इस निर्णय को लेकर व्यापक प्रचार-प्रसार और सामाजिक जागरूकता अभियान चलाएगी, ताकि सदियों पुरानी कुप्रथा का अंत हो सके।

बताया गया कि महासू धाम हनोल मंदिर के तीन शिखरों में से मुख्य गर्भगृह वाले पांडवकालीन शिखर पर वर्ष 2004 में स्वर्ण कलश स्थापित हो चुका था। अब शेष दो शिखरों पर कलश स्थापित किए जाएंगे। चढ़ावे के सोने को रिफाइन कर अमृतसर से आए अनुभवी स्वर्णकारों से कलश तैयार कराए गए हैं।

बैठक में पांशीबिल के बजीर जयपाल सिंह पंवार, सचिव मोहनलाल सेमवाल, सुनील राणा, भुवनेश्वर पंवार, किशन सिंह राणा, संतराम चौहान, रघुवीर सिंह पंवार, महेंद्र सिंह चौहान समेत कई लोग मौजूद रहे।

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