
“स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” थीम पर यूकॉस्ट, जैव विविधता बोर्ड और लक्ष्य सोसाइटी का संयुक्त आयोजन**
देहरादून। अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के अवसर पर गुरुवार को उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) परिसर, देहरादून में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम को यूकॉस्ट, उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड और लक्ष्य सोसाइटी ने संयुक्त रूप से आयोजित किया। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों, सेना अधिकारियों और विद्यार्थियों की उपस्थिति ने इसे एक यादगार आयोजन बना दिया।
मंत्री कैड़ा बोले — पर्यावरण संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी
कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार के पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री राम सिंह कैड़ा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी नहीं बल्कि यह सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा और सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। मंत्री ने इस अवसर पर परिषद के सामुदायिक रेडियो स्टेशन “विज्ञान वाणी” के माध्यम से जनता के लिए एक विशेष संदेश भी साझा किया।

यूकॉस्ट पार्क में 5,000 पौधे, 265 प्रजातियां — डॉ. मिश्रा
यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने जैव विविधता संरक्षण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए यूकॉस्ट की **”मां धरा नमन”** पहल की विस्तृत जानकारी प्रतिभागियों के साथ साझा की। यूकॉस्ट के वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. आशुतोष मिश्रा ने यूकॉस्ट जैव विविधता पार्क पर एक विशेष प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि इस पार्क में 5,000 से अधिक पौधे, 265 से अधिक प्रजातियां तथा 1,000 से अधिक बांस के पौधे संरक्षित हैं। समृद्ध वनस्पति के कारण यह पार्क तितलियों, पक्षियों, सर्पों एवं अनेक जीव-जंतुओं के लिए एक प्राकृतिक आवास के रूप में विकसित हो चुका है और जैव विविधता संरक्षण का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन गया है।
कल्याण सिंह रावत की चेतावनी — खतरे में है पहाड़ की जैव विविधता
पद्मश्री एवं मैती आंदोलन के संस्थापक श्री कल्याण सिंह रावत ने कार्यक्रम में गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता गंभीर खतरे में है। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान एवं पारिस्थितिकीय प्रणालियों के संरक्षण की आवश्यकता पर विशेष बल दिया और कहा कि पहाड़ की संस्कृति और प्रकृति एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़ी हैं।

इको टास्क फोर्स के हरित अभियानों की जानकारी दी
विशिष्ट अतिथि कर्नल प्रतुल थपलियाल, टेरिटोरियल आर्मी ने पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के लिए इको टास्क फोर्स द्वारा संचालित विभिन्न हरित अभियानों की विस्तृत जानकारी उपस्थित प्रतिभागियों के साथ साझा की। यूकॉस्ट के संयुक्त निदेशक डॉ. डी.पी. उनियाल ने पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए की-स्टोन प्रजातियों के संरक्षण को अनिवार्य बताया।
विद्यार्थियों की भागीदारी से जीवंत हुआ आयोजन
कार्यक्रम में यूकॉस्ट एवं आंचलिक विज्ञान केंद्र के अधिकारियों के साथ-साथ माया देवी यूनिवर्सिटीऔर तुलाज इंस्टिट्यूट के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन यूकॉस्ट की वैज्ञानिक अधिकारी जाग्रति उनियाल ने किया जबकि आंचलिक विज्ञान केंद्र देहरादून के प्रभारी डॉ. नवीन जोशीने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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