
देहरादून/रुद्रपुर । उत्तराखण्ड को “अपराध मुक्त” बनाने के अभियान के तहत स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस रैकेट पर बड़ा प्रहार करते हुए इसके मास्टरमाइंड सतानंद शर्मा को रुद्रपुर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी फर्जी लाइसेंस बनाने के गंभीर मामले दर्ज हैं और वह पहले भी जेल जा चुका है।
एसटीएफ के अनुसार, सतानंद शर्मा ने कूटरचित तरीके से शस्त्र लाइसेंस तैयार कर बड़े पैमाने पर अवैध कमाई की। जांच में सामने आया है कि उसके बैंक खाते में इस अवैध कारोबार से करीब 1.70 करोड़ रुपये का लेन-देन हुआ है। वह ऊधमसिंह नगर में सौरभ अग्रवाल और गौरव अग्रवाल के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों के फर्जी लाइसेंस बनवाता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि आरोपी ने शाहजहांपुर स्थित जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के कुछ संविदाकर्मियों की मिलीभगत से पुराने और गायब हो चुके UIN नंबरों का दुरुपयोग कर ऑनलाइन पोर्टल पर फर्जी लाइसेंस अपलोड कराए। इसके जरिए बाहरी राज्यों से आए लोगों के लाइसेंस को वैध दिखाकर अवैध शस्त्रों का इस्तेमाल कराया जा रहा था।
एसटीएफ की कार्रवाई में अब तक 14 अवैध शस्त्र, जिनमें 2 ऑटोमैटिक पम्प एक्शन गन, 2 राइफल, 9 पिस्टल और 1 रिवॉल्वर शामिल हैं, के साथ 355 जिंदा कारतूस और कई फर्जी लाइसेंस बरामद किए जा चुके हैं। इस मामले में तीन मुकदमे दर्ज कर 9 आरोपियों को जेल भेजा जा चुका है।
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने बताया कि राज्य में बाहरी राज्यों से ट्रांसफर होकर आए हजारों शस्त्र लाइसेंसों का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की है कि जिनके पास फर्जी या संदिग्ध शस्त्र लाइसेंस हैं, वे स्वयं पुलिस के समक्ष सरेंडर करें, अन्यथा सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
एसटीएफ ने लोगों से यह भी आग्रह किया है कि यदि किसी को फर्जी शस्त्र लाइसेंस से संबंधित कोई सूचना मिलती है तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।

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