

नई दिल्ली। देश की बदलती सुरक्षा जरूरतों के मद्देनजर नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में सोमवार को त्रि-सैन्य भावी युद्धकला पाठ्यक्रम के चौथे संस्करण का शुभारंभ हुआ। उद्घाटन सत्र को चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजा सुब्रमणि ने संबोधित किया और मुख्य व्याख्यान दिया।
सीडीएस ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। इसमें पारंपरिक हथियारों के साथ-साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्षमताएं, स्वायत्त प्रणालियां, सूचना द्वंद्व, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और डेटा आधारित निर्णय प्रक्रिया की भूमिका निर्णायक होती जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का पहले से अनुमान लगाकर विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में उनका प्रभावी जवाब देने की क्षमता विकसित करना जरूरी है।
जनरल सुब्रमणि ने राष्ट्रीय रक्षा तैयारियों को मजबूत करने के लिए सशस्त्र बलों, रक्षा उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और एकीकरण की आवश्यकता भी बताई। उनका कहना था कि आने वाले समय में युद्ध केवल जमीन, हवा और समुद्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि साइबर और अंतरिक्ष जैसे नए डोमेन भी इसका अहम हिस्सा होंगे।
एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय के मार्गदर्शन में आयोजित यह चार सप्ताह का पाठ्यक्रम तीनों सेनाओं के अधिकारियों के साथ सरकार, रक्षा उद्योग, शिक्षण संस्थानों और सामरिक संगठनों के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाएगा।
पाठ्यक्रम के दौरान भू-राजनीतिक समीकरण, उभरती प्रौद्योगिकियां, संज्ञानात्मक एवं साइबर युद्ध, बहु-क्षेत्रीय सैन्य अभियान, परिदृश्य निर्माण और प्रौद्योगिकी आधारित संघर्ष जैसे विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार इस तरह के पाठ्यक्रमों का उद्देश्य भविष्य के युद्धों के लिए संयुक्त सोच विकसित करना और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल को और मजबूत करना है।

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